पिछले दशक में उत्तर प्रदेश में महिलाओं की श्रम-भागीदारी दर में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। 2017-18 में यह मात्र 14% थी, जो अब 2023-24 में बढ़कर 36% हो गई है—एक ऐसी छलांग जो सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है । यह केवल संख्यात्मक वृद्धि नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक जीवन में सक्रिय सहभागिता और सशक्तीकरण का प्रतीक है।
महिलाओं को सरकारी योजनाओं, उद्योगों और स्वरोजगार से जोड़ने में योगी सरकार के प्रयासों का खास योगदान रहा है । इस लेख में हम इस परिवर्तन के कारण, नीति-गत फैसले और महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे क्या किया जा सकता है, इसके पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सरकारी नीतियाँ और पहल: बदलाव का आधार
इस बदलाव का केंद्र रहा Mission Shakti जैसी योजनाएँ, जिन्होंने महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध करवाने पर ध्यान केंद्रित किया है । इसके अलावा, रात्रिकालीन शिफ्ट को अनुमति मिलना, सरकार की भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को प्राथमिकता देना, और उद्योगों में रोजगार बढ़ाने की पहलें शामिल हैं । खास उल्लेखनीय यह है कि पहले प्रतिबंधित फैक्ट्री सेक्टर में महिलाओं को अब सभी 29 श्रेणियों में काम करने की अनुमति दी गई है—जहाँ पहले केवल 12 या 16 श्रेणियाँ खोली गई थीं। इसके साथ ही, e-Shram पोर्टल पर महिलाओं का 53% रजिस्ट्रेशन, और निर्माण क्षेत्र में 34.65% हिस्सेदारी ने पदों पर महिला उपस्थिति को मजबूत किया है। ये पहल सामूहिक रूप से महिला रोजगार के इकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं।
स्वरोजगार और महिला आत्मनिर्भरता
सरकार द्वारा 10 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह (SHGs) का निर्माण किया गया, जिससे 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वरोजगार और लघु उद्योगों में जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। इन समूहों ने वित्तीय सशक्तीकरण, उद्यमशीलता और ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला भागीदारी को बढ़ावा दिया है। SHGs महिलाओं को सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बना रही, बल्कि आत्म-सम्मान और निर्णय क्षमता भी उपलब्ध करा रही हैं। यह मिसाल SEWA जैसे संगठनों से मेल खाती है—जहँ 1970 के दशक से महिलाओं को स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त बनाने का प्रयास हो रहा है। SHGs और बैंकिंग, माइक्रो-फाइनेंस के क्षेत्र में इनके असर से परिवार और समाज में महिलाओं की स्थिति और आत्मविश्वास में सुधार हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार: MNREGA का योगदान
ग्रामीण उत्तर प्रदेश में MNREGA (महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) ने भी महिलाओं की भागीदारी को विशेष बढ़ावा दिया है। 2025-26 की पहली तिमाही में, महिलाओं ने 45.05% कार्यदिवस अर्जित किए, जबकि यह संख्या 2018-19 में केवल 35.28% थी T। प्रयागराज में यह दर और भी अधिक—46.71%—पहुंच गई, जिसने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उनकी स्थिति को मजबूत किया है Tसाथ ही, योजनाओं में महिलाओं को ‘मेट्स’ (सह-परिसर प्रबंधक) के रूप में शामिल करने की पहल ने उन्हें नेतृत्व की ओर बढ़ने का अवसर दिया। इस प्रतिबद्धता ने न केवल रोजगार सुनिश्चित किया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया और समाज में लोकप्रिय भूमिका में भी स्थापित किया है।
व्यापक अर्थव्यवस्था में असर और दीर्घकालिक संभावनाएं
महिला श्रम-भागीदारी में यह वृद्धि न सिर्फ व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। इससे घरेलू आय, खपत और कर राजस्व में योगदान बढ़ता है, जो आर्थिक विकास के लिए सहायक है। हालांकि, अभी यूपी की महिला श्रम-भागीदारी राष्ट्रीय औसत (45%) से थोड़ी पीछे है, लेकिन 14% से 36% की उछाल दर्शाती है कि सुधार की दिशा में ठोस काम हुआ है Reuters के विश्लेषकों के अनुसार, भारत की महिला भागीदारी में वृद्धि अभी मुख्यतः स्वरोजगार आधारित है, और औपचारिक रोजगार का हिस्सा सीमित है—इसलिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार पर ध्यान देने की जरूरत है । दीर्घकाल में, बेहतर संरचनात्मक सुधार, कार्यस्थल सुरक्षा, बाल देखभाल और स्वरोजगार व औपचारिक रोजगार दोनों को सहारा देने वाली नीतियाँ जरूरी हैं।
निष्कर्ष: समग्र प्रगति और आगे का मार्ग
संक्षेप में, उत्तर प्रदेश ने महिला श्रम-भागीदारी में अभूतपूर्व विकास दिखाया है—जहाँ यह 14% से बढ़कर 36% हो गई है। यह केवल प्रतिशतों की कहानी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, विकल्पों की स्वतंत्रता, आर्थिक अधिकार और नेतृत्व क्षमता की कहानी है। सरकारी योजनाओं और ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार—दोनों में महिलाओं की समावेशी भागीदारी ने इस प्रगति को संभव बनाया है। हालांकि अभी राष्ट्रीय औसत से कुछ पीछे हैं, लेकिन यह मार्ग प्रशस्त करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प दिखाता है। भविष्य में, रोजगार के बेहतर अवसर, संरचित स्वरोजगार, औपचारिक क्षेत्र में भागीदारी और कार्यस्थल सुरक्षा पर और काम ज़रुरी है। यूपी ने दिशा तय कर ली है—अब जरूरत है निरंतरता और गुणवत्ता की।











